रास्ता पता है मगर..मंजिल से अनजान हूँ

रास्ता पता है मगर..मंजिल से अनजान हूँ

Monday, 20 June 2016

'रिकी' एट वाॅकिंग

#रिकी_बॉस
आज कल ये जनाब मोर्निंग वाक पर जाने लगे हैं. मैं हैरान हो गया इसके लैपटॉप में एक विडियो देख कर.
नेम्ड एज- The Absolute Fastest Way To Lose Belly Fat.
कभी उसी जगह पे मैंने  How To Gain Weight In 15 Days के नाम की विडियो फाइल भी देखी थी.
सो मैंने पूछ ही डाला उसके पेट की तरफ की इशारा करके- क्या हाल है अब इसके..?
बोला- बड़ा बेहाल हूँ. बस अभी उस हाल तक नहीं पहुंचना है जब मुझे शूज लेस को बाँधने के लिए, मुझे बैठना न पड़े.
बैठे हुए में, शर्ट के बीच के बटन को खोलने की जरुरत न पड़े. और मुझे अपने पैर के अंगूठे का व्यू मिलता रहे.
"बस कर भई, रुलाएगा क्या..? और अब तू तो दौड़ने भी जा रहा है ना..?"
"हाँ, जा तो रहा हूँ.."
"तो.. कैसा चल रहा है.. वहां.., एनीथिंग स्पेशल..?"
"ह्म्म्म... एक बुजुर्ग हैं, लगभग 80 के ऊपर तो जरुर होंगे.. उनको रोज़ देखता हूँ, साइकिल चलाया करते हैं सुबह- सुबह.
मैं जहाँ बैठ के योगा करता हूँ, वो भी वहीँ बैठा करते हैं. लेकिन मैं यूज़अली उनके बाद बैठता हूँ.
यानि जब मैं वहां पहुँचता हूँ, तब वो उठ के वहां से चल देता हैं.."
"हम्म..."
"एक रोज़ मैं उनके आने से पहले ही वहां बैठ कर कपालभाति (व्हाटेवर इट इज..) कर रहा था.या तो मैं जल्दी पहुँच गया था, या उस दिन
वो लेट हो गए थे. उन्होंने अपनी साइकिल रोकी, उतरे और अपनी सीट की तरफ नज़र दौड़ाई. मुझे देख उनके पैर जैसे रुक गए.
और वो वहीँ खड़े रहे. मैंने उनको वहां खड़ा देख बांकी बचे जगह पे हाथ मार के इशारा ऐसे किया जैसे कोई छोटे बच्चे को बैठने के लिए बुलाता हो.
अपनी कमर पे हाथ रखते हुए, वो मेरी और बढ़ने लगे.
हाइट करीब साढ़े चार फीट से कुछ जायदा होगी, दाहिने हाथ में गमले का टैटू बनवाया था. बांये हाथ में एक घड़ी पहनी थी.
वो आये और मेरे बगल में खाली पड़ी सीट पर बैठ गए. और इधर मैं कपालभाति  व्यस्त रहा.
" ये दाहिने पैर में ठुड्डी के नीचे ऑपरेशन कराया हैं मैंने अपोलो दिल्ली में." , उन्होंने ख़ामोशी को तोड़ते हुए कहा.
आई नोडेड.
"3 महीना रहा मैं वहां. दामाद वहां कैप्टेन (आर्मी)  हैं. वहीँ बहु ने भी बड़ी सेवा करी.."
आई नोडेड.
"यहीं, खटीमा में रतूड़ी में दिखाया था, उसने ऑपरेशन किया, साले! ने ठग लिया. कुछ आराम तो हुआ नहीं!"
आई नोडेड, अगेन.
" ओपोलो में, वहां एक डॉक्टर ने मुझे सुबह साइकिल चलाने या पैदल चलने को कहा. बिहार का था वो.. पांडेय!!
बहुत अच्छा था वो."
मैं मुस्कराया. "अभी कैसी हालत है, आपकी..", मैंने पूछा.
"हाँ, आराम तो है.."
कह के चुप हो गए, फिर वो चल दिए, उठ के वहां से.
**डे आफ्टर नेक्स्ट डे**
"अरे आज आप पैदल ही चल रहे है..? साइकिल को क्या हुआ..?", मैंने पूछा.
"ये दामाद लाया है, दिल्ली से..", बड़ा लम्बा से कुछ सॉक्स जैसा था, उसको दिखाते हुए उन्होंने कहा.
"अच्छा.. तो इसमें कुछ आराम है.. कुछ..?", मैंने पूछा.
"हाँ, आराम  हो जाएगा.. , इसका ऑपरेशन कराया था...", फिर वो वही पुराना अपोलो हॉस्पिटल वाली कहानी बताने लगे.
"अभी इसी बीच 5.30 लाख का हेल्थ इंश्योरंस तुड़वाया के वहां ऑपरेशन करवाया.."
आई नोडेड.
कुछ देर बैठे और वो चल दिए.
##
"फिर..?". मैंने कहा.
"मतलब देख न, आप तब नहीं मरते हैं, जब आप मरना चाहते हैं. बल्कि अब तब मरते हैं जब आप जीना छोड़ देते हैं.", रिकी सेज.
इसलिए लिव लाइक, देयर इज नो टुमारो!!
HAPPY INTERNATIONAL YOGA DAY!

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