#लड़की_का_लाइन_देना
#व्यंग्य #मजाक
भाई साब ने फ़ोन उठाया! हमारे फिजिक्स के टीचर की मिमिक्री करते हुए मैंने पुछा-
"क्या चल रहा है.?"
वो तपाक से बोल पड़े- "ट्रेन चल रहा है".
उनके जवाब से मैं थोड़ा संभाला, मुझे लगा वो कहेंगे- "फोग्ग चल रहा है"
हालांकि मैं उनको तब भी बताना चाहता था, की भैया ट्रेन चल "रही है". लेकिन मैंने भी न ज्यादा
सीरियस होते हुए उनके मजाक को मजाक में ही लिया.
पुछा, "कहाँ जा रहे हैं अभी ट्रेन से..?"
बोले- "दिल्ली अब दूर नहीं, और साउथ एक्स वहां से..!!"
अच्छा! ट्रेन का नाम सुनते ही ख्याल आया, "ट्रेन में मिली" टाइटल से एक कहानी पढ़ी थी मैंने,
तो पूछ डाला..
"डीड यू गेट एनी नाईस कंपनी/गर्ल..??"
ही सेड- "यप!"
"इज शी ब्यूटीफुल..?"
हाउ यू नो देट इज, "शी"....? (शी पे ज्यादा जोर देते हुए कहा)
मैं हंसा. "बस ऐसे ही. आई गेस्ड!"
"टेल मी, इज शी ब्यूटीफुल एनफ फॉर यू..?" (मैंने दोबारा पूछा)
"आई विल टेल यू ऑल, लेटर. वी आर नॉट टॉकिंग ऑन दिस टॉपिक राईट नाउ."
भई, जब आप सेकंड ऐ.सी. में बैठे हो, तो हिंदी से तो दूर-दूर तक नाता नहीं रहता है. कुछ तो क्लास शो करना पड़ता है न!,
और फिर जब सामने लड़की बैठी हो, फिर तो बनता है इंग्लिश में बात करना.
"भैया प्लीज बताइए न, आई रियली वाना नो.."
थोड़ा फस्ट्रेटड होते हुए उन्होंने धीरे से कहा," फर्स्टली, योर फर्स्ट क्वेश्चन वाज रॉंग.."
आई ट्राइड टू रेमेम्बेर. व्हाट वाज द फर्स्ट क्वेश्चन.
"सो, शी इज नॉट गर्ल..??"
"आहां.."
"ओकीज!!! सो शी इज इन मिड, लाइक 40-50+..?"
"नोप!"
"OMG! यू मीन शी इज एवेरी मेन'स फेंटेसी...??"
आई वेटेड फॉर हिज आंसर
आफ्टर व्हाइल, ब्रेकिंग हीज पॉज ही सेड..
"नाउ! यू आर टॉकिंग"
"यू आर सो लकी B!, यू मेंट शी इज न्यूली मैरिड एंड इन लेट ट्वेन्टीज..??
"देट्स राईट.."
आई वाज रियली एक्साइटेड, यू नो व्हाट. इट्स एवेरी मेंस फेंटेसी टू बी विथ वुमेन हु इज लिटिल ओल्डर देन यू.
"तो.. लाइन दे रही है क्या आपको..?", आई आस्कड.
वो हँसे. "रिकी, आई विल टेल यू लेटर..एवरीथिंग.. ईच डिटेल्स.."
"नहीं, मुझे अभी जानना है."
"ह्म्म्म..." उन्होंने कहा.
"ओह ग्रेट..!! नाउ रिपीट आफ्टर मी, सो शी कैन हियर इट.."
"व्हाट..??"
"हाँ, वो लाइन दे रही है..!!", आई सेड एंड लाफ्ड आउट लाउड.
"पागल है क्या..?" , ही ऑलमोस्ट फ्रिक्ड आउट.
"ड्यूड, रिपीट आफ्टर मी, ट्रस्ट मी इट विल बी फन"
उनके हँसने की आवाज़ मैं सुन रहा था..
वो कुछ कहते इससे पहले ही कॉल डिसकनेक्ट हो गया.
कॉल ड्राप! और मेय बी नेटवर्क इशू..
मैं सोचने लगा, "यार! ये पता कैसे चलता है, की लड़की लाइन दे रही है..?"
मुझे तो कभी किसी ने लाइन नहीं दिया अब तक..
फिर याद आने लगा.. वो पुरानी बातें.. जब...
क्लास में हर वक़्त तो मालिनी मुझे देखा करती थी..
अर्चना, तो देख के सीटी भी मारा करती थी..
राधा, पता नहीं हमेशा देख के शर्मा क्यू जाती थी..
सुलोचना, तो कभी कभी हँस हँस के मजाक भी कर लिया करती थी..
सुनैना और आरती तो देख के एक आँख बंद कर लेती थी.. ऐसे..ऐसे..
चांदनी, पता नहीं क्यू चलते चलते मेरे हाथ में अपना हाथ टच कर लेती थी..
भारती, पता नहीं क्यू अपने हाथों को अपने होठों के सामने ला कर फूँक मारा करती थी..
और ये सुनीता, पता नहीं क्यू इतना चिपकती थी..
प्रियम्बदा, पता नहीं क्यू मेरे पी.जे को इतना एन्जॉय करती थी.. ,"यू आर वेरी फनी रिकी"
मेरे बगल वाली सीट पर बैठने के लिए सीमा पता नहीं क्यू सबसे लड़ती रहती थी... लड़ाकू कहीं की..!!
और ये पीछे वाली सीट पर बैठ के संयोगिता पता नहीं क्यू मेरे जूते अपने पैरों से उतरा करती थी..
रंजिता, पता नहीं क्यू अक्सर फ़ोन के बताया करती थी, "रिकी! मेरे घर पे अभी कोई नहीं है.."
रचिता, पता नहीं क्यू स्कूटी पे अपने मुझे हमेशा लिफ्ट ऑफर किया करती थी.
( दो मिनट का रास्ता नहीं था मेरे घर का, ऊपर से इतने सारे स्पीड ब्रेकर.. उफ्फ्फ...)
रागनी, पता नहीं क्यू मुझे हमेशा काफी पिलाने को जिद करती थी.. वो भी CCD में..
(A lot can happen, over a cup of coffee)
मेरे आईसक्रीम से आधा हिस्सा तो ऐश्वर्या ही मांग कर ही खा लेती थी... भूक्खड़ कहीं की..
और ये स्वस्तिका को पता नही क्या होता था, अक्सर अपने दोनों होठों को एक दुसरे पर चढ़ा कर देखा करती थी..
सबसे वीयर्ड! ये अवंतिका, पता नहीं क्यू हमेशा "खा जाऊं तेरे को, खा जाऊं तेरे को" कहा करती थी..
(मैं कोई बटर स्कॉच फ्लेवर की आइसक्रीम था क्या..!! हाँ नि तो..)
और ये रजनी, पता नहीं क्यू हमेशा रुमाल ला के दिया करती थी..
(मेरे पास था अपना.. फिर भी..!!)
और ये अर्ची, राहुल से चिपक के मुझे क्यू देखा करती थी..
पता नहीं क्यू,अनुखी, देख के अजीब सी आवाजें निकाला करती थी..
लेकिन मेरा दिल तो उसको हमेशा देखा करता था.. वो स्वरागिनी थी न.. हाँ..वही..
उसने भी कभी लाइन ही नही दिया..
छे: ये जीना भी कोई जीना है, एक भी लड़की नहीं है. और अभी तक नहीं आया समझ की
"ये लड़कियां लाइन कैसे देती है..??"
अगर पता चल जाता न, तो... उम्म्म्म...ह्म्म्म... मजेए आ जाते...
{ अपनी सुरक्षा की दृष्टि से मैंने सभी लडकियों के नाम बदल दिया है, यकीं मानिए "1001 नेम्स ऑफ़ बेबी गर्ल" की साईट खोल कर
बैठा हूँ, लेकिन अगर फिर भी इस पर कोई आपत्ति है, तो मुंह में ठंडा पानी भर के कुल्ला कर लीजिये और सो जाइये, पारा बहुत चढ़ा है, और वैसे भी
इन्टरनेट पर हमेशा गर्मी बढ़ी रहती है.}
( लास्ट लाइन भानु भैया से ले कर यहाँ चिपकाई गयी है)
P.S- अजी, ये मजाक ही है, हँस के भूल जाइए.!!
#व्यंग्य #मजाक
भाई साब ने फ़ोन उठाया! हमारे फिजिक्स के टीचर की मिमिक्री करते हुए मैंने पुछा-
"क्या चल रहा है.?"
वो तपाक से बोल पड़े- "ट्रेन चल रहा है".
उनके जवाब से मैं थोड़ा संभाला, मुझे लगा वो कहेंगे- "फोग्ग चल रहा है"
हालांकि मैं उनको तब भी बताना चाहता था, की भैया ट्रेन चल "रही है". लेकिन मैंने भी न ज्यादा
सीरियस होते हुए उनके मजाक को मजाक में ही लिया.
पुछा, "कहाँ जा रहे हैं अभी ट्रेन से..?"
बोले- "दिल्ली अब दूर नहीं, और साउथ एक्स वहां से..!!"
अच्छा! ट्रेन का नाम सुनते ही ख्याल आया, "ट्रेन में मिली" टाइटल से एक कहानी पढ़ी थी मैंने,
तो पूछ डाला..
"डीड यू गेट एनी नाईस कंपनी/गर्ल..??"
ही सेड- "यप!"
"इज शी ब्यूटीफुल..?"
हाउ यू नो देट इज, "शी"....? (शी पे ज्यादा जोर देते हुए कहा)
मैं हंसा. "बस ऐसे ही. आई गेस्ड!"
"टेल मी, इज शी ब्यूटीफुल एनफ फॉर यू..?" (मैंने दोबारा पूछा)
"आई विल टेल यू ऑल, लेटर. वी आर नॉट टॉकिंग ऑन दिस टॉपिक राईट नाउ."
भई, जब आप सेकंड ऐ.सी. में बैठे हो, तो हिंदी से तो दूर-दूर तक नाता नहीं रहता है. कुछ तो क्लास शो करना पड़ता है न!,
और फिर जब सामने लड़की बैठी हो, फिर तो बनता है इंग्लिश में बात करना.
"भैया प्लीज बताइए न, आई रियली वाना नो.."
थोड़ा फस्ट्रेटड होते हुए उन्होंने धीरे से कहा," फर्स्टली, योर फर्स्ट क्वेश्चन वाज रॉंग.."
आई ट्राइड टू रेमेम्बेर. व्हाट वाज द फर्स्ट क्वेश्चन.
"सो, शी इज नॉट गर्ल..??"
"आहां.."
"ओकीज!!! सो शी इज इन मिड, लाइक 40-50+..?"
"नोप!"
"OMG! यू मीन शी इज एवेरी मेन'स फेंटेसी...??"
आई वेटेड फॉर हिज आंसर
आफ्टर व्हाइल, ब्रेकिंग हीज पॉज ही सेड..
"नाउ! यू आर टॉकिंग"
"यू आर सो लकी B!, यू मेंट शी इज न्यूली मैरिड एंड इन लेट ट्वेन्टीज..??
"देट्स राईट.."
आई वाज रियली एक्साइटेड, यू नो व्हाट. इट्स एवेरी मेंस फेंटेसी टू बी विथ वुमेन हु इज लिटिल ओल्डर देन यू.
"तो.. लाइन दे रही है क्या आपको..?", आई आस्कड.
वो हँसे. "रिकी, आई विल टेल यू लेटर..एवरीथिंग.. ईच डिटेल्स.."
"नहीं, मुझे अभी जानना है."
"ह्म्म्म..." उन्होंने कहा.
"ओह ग्रेट..!! नाउ रिपीट आफ्टर मी, सो शी कैन हियर इट.."
"व्हाट..??"
"हाँ, वो लाइन दे रही है..!!", आई सेड एंड लाफ्ड आउट लाउड.
"पागल है क्या..?" , ही ऑलमोस्ट फ्रिक्ड आउट.
"ड्यूड, रिपीट आफ्टर मी, ट्रस्ट मी इट विल बी फन"
उनके हँसने की आवाज़ मैं सुन रहा था..
वो कुछ कहते इससे पहले ही कॉल डिसकनेक्ट हो गया.
कॉल ड्राप! और मेय बी नेटवर्क इशू..
मैं सोचने लगा, "यार! ये पता कैसे चलता है, की लड़की लाइन दे रही है..?"
मुझे तो कभी किसी ने लाइन नहीं दिया अब तक..
फिर याद आने लगा.. वो पुरानी बातें.. जब...
क्लास में हर वक़्त तो मालिनी मुझे देखा करती थी..
अर्चना, तो देख के सीटी भी मारा करती थी..
राधा, पता नहीं हमेशा देख के शर्मा क्यू जाती थी..
सुलोचना, तो कभी कभी हँस हँस के मजाक भी कर लिया करती थी..
सुनैना और आरती तो देख के एक आँख बंद कर लेती थी.. ऐसे..ऐसे..
चांदनी, पता नहीं क्यू चलते चलते मेरे हाथ में अपना हाथ टच कर लेती थी..
भारती, पता नहीं क्यू अपने हाथों को अपने होठों के सामने ला कर फूँक मारा करती थी..
और ये सुनीता, पता नहीं क्यू इतना चिपकती थी..
प्रियम्बदा, पता नहीं क्यू मेरे पी.जे को इतना एन्जॉय करती थी.. ,"यू आर वेरी फनी रिकी"
मेरे बगल वाली सीट पर बैठने के लिए सीमा पता नहीं क्यू सबसे लड़ती रहती थी... लड़ाकू कहीं की..!!
और ये पीछे वाली सीट पर बैठ के संयोगिता पता नहीं क्यू मेरे जूते अपने पैरों से उतरा करती थी..
रंजिता, पता नहीं क्यू अक्सर फ़ोन के बताया करती थी, "रिकी! मेरे घर पे अभी कोई नहीं है.."
रचिता, पता नहीं क्यू स्कूटी पे अपने मुझे हमेशा लिफ्ट ऑफर किया करती थी.
( दो मिनट का रास्ता नहीं था मेरे घर का, ऊपर से इतने सारे स्पीड ब्रेकर.. उफ्फ्फ...)
रागनी, पता नहीं क्यू मुझे हमेशा काफी पिलाने को जिद करती थी.. वो भी CCD में..
(A lot can happen, over a cup of coffee)
मेरे आईसक्रीम से आधा हिस्सा तो ऐश्वर्या ही मांग कर ही खा लेती थी... भूक्खड़ कहीं की..
और ये स्वस्तिका को पता नही क्या होता था, अक्सर अपने दोनों होठों को एक दुसरे पर चढ़ा कर देखा करती थी..
सबसे वीयर्ड! ये अवंतिका, पता नहीं क्यू हमेशा "खा जाऊं तेरे को, खा जाऊं तेरे को" कहा करती थी..
(मैं कोई बटर स्कॉच फ्लेवर की आइसक्रीम था क्या..!! हाँ नि तो..)
और ये रजनी, पता नहीं क्यू हमेशा रुमाल ला के दिया करती थी..
(मेरे पास था अपना.. फिर भी..!!)
और ये अर्ची, राहुल से चिपक के मुझे क्यू देखा करती थी..
पता नहीं क्यू,अनुखी, देख के अजीब सी आवाजें निकाला करती थी..
लेकिन मेरा दिल तो उसको हमेशा देखा करता था.. वो स्वरागिनी थी न.. हाँ..वही..
उसने भी कभी लाइन ही नही दिया..
छे: ये जीना भी कोई जीना है, एक भी लड़की नहीं है. और अभी तक नहीं आया समझ की
"ये लड़कियां लाइन कैसे देती है..??"
अगर पता चल जाता न, तो... उम्म्म्म...ह्म्म्म... मजेए आ जाते...
{ अपनी सुरक्षा की दृष्टि से मैंने सभी लडकियों के नाम बदल दिया है, यकीं मानिए "1001 नेम्स ऑफ़ बेबी गर्ल" की साईट खोल कर
बैठा हूँ, लेकिन अगर फिर भी इस पर कोई आपत्ति है, तो मुंह में ठंडा पानी भर के कुल्ला कर लीजिये और सो जाइये, पारा बहुत चढ़ा है, और वैसे भी
इन्टरनेट पर हमेशा गर्मी बढ़ी रहती है.}
( लास्ट लाइन भानु भैया से ले कर यहाँ चिपकाई गयी है)
P.S- अजी, ये मजाक ही है, हँस के भूल जाइए.!!

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