रास्ता पता है मगर..मंजिल से अनजान हूँ

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Monday, 6 June 2016

गाम गोलमा- Village Golma (About This Blog)

#गाम_गोलमा
नाउ दिस इज गोना बी माय न्यू ब्लॉग'स नेम.
इससे पहले जो था "डायरी ऑफ़ मंजेश झा", वाज नॉट क्वाइट इंट्रेस्टिंग, वाज इट..?
इसीलिए मैंने सोचा कुछ अलग होना चाहिए, कुछ क्रिएटिव. सो आई केम अप विथ दिस.
शायद आप इस बात से परिचित हो की मेरे गाँव का नाम गोलमा है.
अगर आप यूजअली वहां नहीं रहते हें, कभी एक आध बार दिख जाते हैं.
तो वहां के बुजुर्ग को अक्सर ये जानने की इक्छा सताती है,
की ये भई! नया आदमी कौन दिख रहा है उनके गाँव में..?
तो वो पूछ ही लेते हैं..??
कुन "गाम" भेलअ तोहर..?? यानी "'आप कौन से गाँव से है..??"
एंड माय आंसर यूज टू बी लाइक .." गोलमा"
सो व्हाई नॉट खटीमा..??
इफ यू आस्क मी डू आई लव खटीमा..?
आई डोंट नो, आई गेस , आई वोंट बी एबल टू आंसर इट, इन अ वर्ड.. लाइक "यस" और "नो"..
येस! आई लव बीइंग हेयर! इट्स ऑलमोस्ट सेवेनटीन इयर्स वी स्पेंट हेयर. आई नो ऑलमोस्ट एवेरी स्ट्रीट, एवेरी लेन
एंड एवरी रोड ऑफ़ इट..
यहीं से तो मैंने पढना सीखा. दोस्ती- यारी सब यहीं पर तो हैं. यहीं पे मुझे अपना पहला लव लैटर मिला.
पहली रिलेशनशिप , इत्ते सारे क्रश एंड आल..
सब कुछ यहीं पे तो किया. वो खिंडा की स्पेशल चोवमिन हो या राम गुलाम के समोशे. वो पार्क के झूले हो
या वहां पे बोट राइडिंग.वो दशहरा सब कुछ.
लेकिन एक बात है न, की आप जिसके पास नहीं रहते, आप को उसकी कमी खलती है.
तो ऐसा ही कुछ है, मेरा, मेरे गाँव से. आई लव बीइंग देयर.
आखिर आई वाज बोर्न देयर. शायद इसीलिए!! एक जुड़ाव लगता है मुझे, गाँव की मिटटी से.
वहां के खेतों से,हरियाली से. मंदिरों से, वहां के राश्तों से.
देट इज व्हाई आई थॉट इट शुड बी "गोलमा" इंस्टेड ऑफ़ "खटीमा."
सो नाउ यू गोना और यू हैवे टू सर्च दिस..
www.gaamgolma.blogspot.com

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