#लप्रेक
29.मई.2012, स्थान- बरेली जंक्शन, प्लेटफार्म-01 , समय-10.10 (रात के)
पात्र- चलिए आपको अपने पात्रों से परिचय करवा जाए, तो जैसा की ये प्रेम कहानी है तो एक लड़का होना चाहिए, और सबसे जरुरी एक लड़की भी (जिसके बिना ये कहानी नहीं बन सकती) ,
एक और पात्र है जो लड़के की बहन है , नहीं-नहीं आप गलत जा रहे हैं , फिलहाल तो इस कहानी में वो विलेन नहीं है |
प्रायः ऐसा कभी होता नहीं है की "देरी" के दूसरे नाम से जाने जानी वाली, मेरा मतलब भारतीय रेल से है , हाँ जी , कभी समय पर पहुंचे, पर इस कहानी में ऐसा नहीं था |
आई मीन यस! आपने सही सुना मेरी ट्रेन टाइम पर थी शायद ड्राईवर सो गया होगा आई गेस!! :D
एनीवे लड़का और उसकी बहन अपने बर्थ की और चलने लगे , लड़के को साइड अपर , बहन को अपर बर्थ मिला था!
लड़के की बहन अपनी सीट पर बैठ चुकी थी और लड़का यहाँ नीचे खड़ा हो कर अपने आस पास के सह-यात्री को देख कर निराश हो रहा था की छे! इस बार ये 18 घंटे का सफ़र
बहुत ही ज्यादा बोरिंग, बदसूरतों, और बूढों,औंटियों के साथ कैसा काटेगा.? की तभी पीछे से लड़की की दोस्त ने लड़के के कंधे पे हाथ रख बुलाते हुए कहा
,"भैया.! प्लीज..ये बैग जरा ऊपर पास कर देना.."
लड़का बोला- श्यौर.! और बैग उठाने नीचे झुका और उसकी नज़र पड़ी.., जी हाँ आप सही जा रहे हैं वो थी लड़की, जो लोअर बर्थ पर विंडो के पास बैठी थी |
कितनी खुबसूरत थी वो , जैसे कोई परी सी |
कद करीब शायद 5"3 रही होगी, बड़ी आँखें , गोल चेहरा,और उसपे उसका चिकन का सफ़ेद सलवार कमीज़ और लाल सिल्क का प्रिंटेड दुप्पट्टा.!
माशाल्लाह..!! सादी लेकिन फिर भी कितनी खुबसूरत..!
तो लड़के ने सामान ऊपर पहुचाया | वो इतना खुश था जैसे किसी ने बिलावल के कान में जा के बोला हो कि "भाईजान! कश्मीर आपके पास ही दोड़ता हुआ आ रहा है"
इसके बाद लड़की ने मुस्कुरा के थैंक्यू कहा! और लड़के ने मुस्कुराते हुए बोला - नो! नो! नो! प्लेजर इज आल माइन..!
ये कह के लड़का अपने बर्थ पे ऊपर चला गया! उसकी रात अब अच्छी काटने वाली थी, उसके अच्छे सपने आज आने वाले थे , उसका सफ़र अब शायद
खुबसूरत जाने वाला था ! लड़के ने अपने सेल फ़ोन में म्यूजिक प्लेयर की प्लेलिस्ट में उसकी मोस्ट प्लयेड आइटम्स में से एक रोमांटिक कहानी को सुनना शुरू किया ,
नेम्ड वाज - यादों का इडियट बॉक्स- "फिर मिलेंगे "
आई डोंट नो वो लड़की पे इम्प्रैशन क्रिएट करना चाहता था शो ऑफ करके या समथिंग एल्स!! बेवकूफ!!
इस बीच लड़के की बहन ने लड़की की दोस्तों से बात करना शुरू किया , बातों बातों में पता चला की उनका NCC कैंप गोरखपुर में लगा है और उन्का ग्रुप भी इसमे शामिल है|
तो इधर लड़का कानों में ईयरफ़ोन लगाये कहानी में मगन था , "अनिरुद्ध और रागनी की कहानी " जिसमे वो अंत में एक बार फिर से साथ हो जाते हैं और कहानी की हैप्पी एंडिंग!
और इधर लड़की अपने टैब में बिजी थी .. बीच-बीच में उनकी नज़रें मिलती और अलग होती, लड़के को अपनी इस कहानी का अंत नहीं पता , ही इज होपिंग फॉर बेस्ट!
तो ऐसे ही रात में उनकी नज़रें कई बार मिली और जुदा हुई.. मीनवाईल दे डीड नॉट एक्सचेंजड ए स्माइल!!
और इसी तरह फिर सुबह हुई और लड़के को साइड लोअर की सीट मिल गयी , तो वो झट से नीचे आ पड़ा, और फिर दोबारा चालू हुआ वो नज़रों को मेल..!
करीब 10 बजे ट्रेन गोरखपुर के प्लेटफार्म पर आई ,और वो लड़की धीरे-धीरे अपने सामान के साथ गेट की और लड़के की सीट की तरफ पहुची और फिर
वो जब कम्पार्टमेंट से जाने ही वाली थी , की वो पीछे मुड़ी.. और अपनी सवालिया आँखों को लड़के की आँखों से मिलाया ,
मानो वो पुछ रही हो... "कुछ कहना है तुम्हे...???"
लड़के ने ऐसे देखा मानो कह रहा हो.. "क्या कहूं...??? "
और लड़की फिर आगे बढ़ गयी और एक बार भी नहीं पीछे मुड़ी....!!
और लड़का उसके जाते हुए देखता रहा ...
उसकी कहानी में "अनिरुद्ध और रागनी की कहानी" की तरह हैप्पी एंडिंग नहीं लिखी थी उस ऊपर बैठे स्क्रिप्ट राइटर ने...
29.मई.2012, स्थान- बरेली जंक्शन, प्लेटफार्म-01 , समय-10.10 (रात के)
पात्र- चलिए आपको अपने पात्रों से परिचय करवा जाए, तो जैसा की ये प्रेम कहानी है तो एक लड़का होना चाहिए, और सबसे जरुरी एक लड़की भी (जिसके बिना ये कहानी नहीं बन सकती) ,
एक और पात्र है जो लड़के की बहन है , नहीं-नहीं आप गलत जा रहे हैं , फिलहाल तो इस कहानी में वो विलेन नहीं है |
प्रायः ऐसा कभी होता नहीं है की "देरी" के दूसरे नाम से जाने जानी वाली, मेरा मतलब भारतीय रेल से है , हाँ जी , कभी समय पर पहुंचे, पर इस कहानी में ऐसा नहीं था |
आई मीन यस! आपने सही सुना मेरी ट्रेन टाइम पर थी शायद ड्राईवर सो गया होगा आई गेस!! :D
एनीवे लड़का और उसकी बहन अपने बर्थ की और चलने लगे , लड़के को साइड अपर , बहन को अपर बर्थ मिला था!
लड़के की बहन अपनी सीट पर बैठ चुकी थी और लड़का यहाँ नीचे खड़ा हो कर अपने आस पास के सह-यात्री को देख कर निराश हो रहा था की छे! इस बार ये 18 घंटे का सफ़र
बहुत ही ज्यादा बोरिंग, बदसूरतों, और बूढों,औंटियों के साथ कैसा काटेगा.? की तभी पीछे से लड़की की दोस्त ने लड़के के कंधे पे हाथ रख बुलाते हुए कहा
,"भैया.! प्लीज..ये बैग जरा ऊपर पास कर देना.."
लड़का बोला- श्यौर.! और बैग उठाने नीचे झुका और उसकी नज़र पड़ी.., जी हाँ आप सही जा रहे हैं वो थी लड़की, जो लोअर बर्थ पर विंडो के पास बैठी थी |
कितनी खुबसूरत थी वो , जैसे कोई परी सी |
कद करीब शायद 5"3 रही होगी, बड़ी आँखें , गोल चेहरा,और उसपे उसका चिकन का सफ़ेद सलवार कमीज़ और लाल सिल्क का प्रिंटेड दुप्पट्टा.!
माशाल्लाह..!! सादी लेकिन फिर भी कितनी खुबसूरत..!
तो लड़के ने सामान ऊपर पहुचाया | वो इतना खुश था जैसे किसी ने बिलावल के कान में जा के बोला हो कि "भाईजान! कश्मीर आपके पास ही दोड़ता हुआ आ रहा है"
इसके बाद लड़की ने मुस्कुरा के थैंक्यू कहा! और लड़के ने मुस्कुराते हुए बोला - नो! नो! नो! प्लेजर इज आल माइन..!
ये कह के लड़का अपने बर्थ पे ऊपर चला गया! उसकी रात अब अच्छी काटने वाली थी, उसके अच्छे सपने आज आने वाले थे , उसका सफ़र अब शायद
खुबसूरत जाने वाला था ! लड़के ने अपने सेल फ़ोन में म्यूजिक प्लेयर की प्लेलिस्ट में उसकी मोस्ट प्लयेड आइटम्स में से एक रोमांटिक कहानी को सुनना शुरू किया ,
नेम्ड वाज - यादों का इडियट बॉक्स- "फिर मिलेंगे "
आई डोंट नो वो लड़की पे इम्प्रैशन क्रिएट करना चाहता था शो ऑफ करके या समथिंग एल्स!! बेवकूफ!!
इस बीच लड़के की बहन ने लड़की की दोस्तों से बात करना शुरू किया , बातों बातों में पता चला की उनका NCC कैंप गोरखपुर में लगा है और उन्का ग्रुप भी इसमे शामिल है|
तो इधर लड़का कानों में ईयरफ़ोन लगाये कहानी में मगन था , "अनिरुद्ध और रागनी की कहानी " जिसमे वो अंत में एक बार फिर से साथ हो जाते हैं और कहानी की हैप्पी एंडिंग!
और इधर लड़की अपने टैब में बिजी थी .. बीच-बीच में उनकी नज़रें मिलती और अलग होती, लड़के को अपनी इस कहानी का अंत नहीं पता , ही इज होपिंग फॉर बेस्ट!
तो ऐसे ही रात में उनकी नज़रें कई बार मिली और जुदा हुई.. मीनवाईल दे डीड नॉट एक्सचेंजड ए स्माइल!!
और इसी तरह फिर सुबह हुई और लड़के को साइड लोअर की सीट मिल गयी , तो वो झट से नीचे आ पड़ा, और फिर दोबारा चालू हुआ वो नज़रों को मेल..!
करीब 10 बजे ट्रेन गोरखपुर के प्लेटफार्म पर आई ,और वो लड़की धीरे-धीरे अपने सामान के साथ गेट की और लड़के की सीट की तरफ पहुची और फिर
वो जब कम्पार्टमेंट से जाने ही वाली थी , की वो पीछे मुड़ी.. और अपनी सवालिया आँखों को लड़के की आँखों से मिलाया ,
मानो वो पुछ रही हो... "कुछ कहना है तुम्हे...???"
लड़के ने ऐसे देखा मानो कह रहा हो.. "क्या कहूं...??? "
और लड़की फिर आगे बढ़ गयी और एक बार भी नहीं पीछे मुड़ी....!!
और लड़का उसके जाते हुए देखता रहा ...
उसकी कहानी में "अनिरुद्ध और रागनी की कहानी" की तरह हैप्पी एंडिंग नहीं लिखी थी उस ऊपर बैठे स्क्रिप्ट राइटर ने...

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